Poem: मंज़िल की ओर बढ़ते जाना हे (Hindi)

Hello Friends!
Trying to write something in Hindi too..
Please comment on it.. How it is?
“लिख दी थी तक़्दीरे मैने
थाम लिया था मंज़िलों का साथ 
एक मुकाम के बाद ना रुकना था 
बढ़ते बढ़ते सबको लेके चलना था 
हज़ारो ने हार मान ली थी 
फिर भी ना मुझे रुकना था 

एहसास था ये दिल मे 
की एक दिन होगी ये ज़िन्दगी मेरे मुट्ठी मे 
पता था की रास्ता अभी बड़ा लम्बा हे 
पर मंज़िल की पुकार थी इन् हवाओं मे
थी मंज़िल बड़ी दूर , ये जानता था 
पर मुझे बढ़ना था 
उन् लोगो के लिए , उन् साथियो के लिए 
जिनका साथ थाम लिया था मैने
बढ़ते बढ़ते चलना था
चलते चलते बढ़ना 
वह एहसास क साथ की 
एक दिन हम जरूर जीतेंगे 
उस मंज़िल पे जरूर पहुचेंगे 
एक हिम्मत और हौसले के साथ
मंज़िल की ओर बढ़ते जाना हे 
मंज़िल की ओर बढ़ते जाना हे 
मंज़िल की ओर बढ़ते जाना हे …”
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with Love,
Ink SLinger #pK
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